शनिवार, 18 नवंबर 2017 | By: kamlesh chander verma

माँ बाप।।

जो थे चिराग कभी घर के,
कैसे देहरी के बुझे दिये हो गये।
जिनके बिना सभी रचनाएं थी अधूरी,
कैसे जिंदगी के हाशीये हो गये ।।

तुम्हारे लिए  ही वक़्त उनके पास था,
आज वक़्त नहीं है उनके लिए,
घर घर नहीं बन पाएगा बिन माँ बाप के,
फिरता रहे बेरुखी के तिनके लिए।
ये ना भूलेंगे तुझे ता उम्र भर ,
भूल जाएंगे वो इनको भूला जिनके लिएll

कैसे छोड़ दोगे इनको उनके हाल पर,
भविष्य तेरा भी लिखा है दीवाल पर।
फिर क्या है मज़बूरी कैसा ईमान है,
मां बाप के साथ ही,इंन्सान क्यूं बेईमान है।

झूठी तरक्की के इस दौड़ में,
मतलबपरस्ती की घुड़ दौड़ में,
छूने की चाहत  में  क्यूं आसमान है।।

कमलेश,लानतें ज़रूर देगा ये ज़माना,
माँ बाप को भुलाना/रुलाना नही आसान  है।।

गुरुवार, 7 सितंबर 2017 | By: kamlesh chander verma

.....लिखता हूँ।।

समंदर के किनारों पर ,अपना नाम लिखता हूँ।
पता है मिटा देंगी इन्हें लहरें।
फिर भी बेखौफ आम लिखता हूँ।।

खुद ही खींच कर समानान्तर लकीरें,
उनके साथ चलता हूँ।
कभी तो मिल जाएं ये आपस में,
दुआओं संग यही पैग़ाम लिखता हूँ।।

कहीं कोई छाप ना लग जाये ,
मेरे शब्दों पर,
कभी रहीम लिखता हूँ ,कभी राम लिखता हूँ।।

चाहे सुबह की लालिमा हो ,या डूबते सूरज की,
ज़िन्दगी की भी इसी कहानी को,
सुबह शाम लिखता हूँ।।

कमलेश, फल की इच्छा अनिच्छा छोड़ इश्वर पर,
मै सीधे अपना अंजाम लिखता हूँ।

मंगलवार, 1 अगस्त 2017 | By: kamlesh chander verma

इन आंसुओं को ....।।

आंसूओ के मोती ,यूँ जाया  ना करो ,
ये दौलत है कीमती, यूँ बहाया ना करो।

हंसते रहना हमेशा, जिनकी फ़ितरत रही,
उनकी खूबसूरती , बेवज़ह यूँ ही गंवाया ना करो।

इनके गिरने से टूट जाते हैं, रास्ते के पत्थर,
झूठे ज़ज़्बातों के ख़ातिर , पलकों को भिगाया ना करो।

जिन आंखों का गर , सूख चुका हो पानी
उन आंखों से इनको हरगिज़ मिलाया ना करो।

कमलेश' है जहां में अब भी, कीमत इनकी,
तोहफ़ा है कुदरत का ,यूँ ही छलकाया ना करो।।

मंगलवार, 25 जुलाई 2017 | By: kamlesh chander verma

तरसता मन ....।।

दीया जलता रहा,मेघ बरसते रहे ,
उनके दीदार को ,ये नैन तरसते रहे।

जा बसे हो जब से,पिया तुम परदेस में,
नैन हर पल उसी राह में ,ये भटकते रहे।

टीश सी उठती है,इस दिल के ज़ख़्म में,
दर्दे -जुदाई में बिलखते रहे,सिसकते रहे।

बीते लम्हों की माला ,इक 2पिरोती रही,
लड़ी बनती रही,दर्द के लम्हे बिखरते रहे।

तेरी सूरत की इस दिल पर,लगी है मुहर,
धुंधली यादों के साये भी, निखरते रहे।

कमलेश,उम्मीद है ,वापस आ जाओगे,
दूर होंगी तन्हाई,मिटेंगें सन्नाटे जो पसरते रहे।

#कमलेश वर्मा।